12 घंटे तक गंगा नदीं में बहने के बावजूद ज़िंदा निकली महिला

जाको राखें साइयाँ मार सके ना कोय…

Story Highlights
  • ठिठरती ठंड और उसमें हड्डियां गला देने वाला गंगा का ठंडा पानी और उसमें तैरती दिखाई दी एक महिला की लाश
  • मछुआरों ने बाहर निकाला तो हुआ चमत्कार
  • महिला की चल रही थी सांसे।
  • 10 किलोमीटर दूर डूबी थी महिला
  • रात भर पानी में लाश की तरह बहती रही

ठंड इतनी ज्यादा है की अच्छे भले आदमी की भी कपकपी छूट जाए, उसपर अगर बात नदी के ठंडे पानी की करें तो वो इतना ठंडा है कि हड्डियां तक गल जाएं। ऐसे में एक महिला गंगा नदी में बह जाती है। बहते हुए देखकर लोग सोचते हैं कि वह एक लाश है। बर्फ जमा देने वाले ठंडे पानी में 12 घंटे तक और करीब 10 किलोमीटर दूर तक बह जाने के बाद मछुआरे उसे देखते हैं और बाहर निकालते हैं।

हम बात कर रहे हैं अनीता देवी नामक महिला की जो राधो पूरा दियारा की रहने वाली है। महिला देर शाम गंगा नदी पर बने पीपा पुल से गुजर रही थी चक्कर आने की वजह से ऑटो से उतरकर पुल पर बैठ गई। इसके बाद उसका पैर फिसला और  वहनदी में जा गिरी। रात भर महिला नदी में बहती रही और राधो पूरा, पीपा पुल से करीब 10 किलोमीटर दूर सुबह-सुबह मछुआरों की एक टोली ने इस महिला अनीता देवी को पानी की धारा के साथ बहते देखा और मरा हुआ समझकर नदी से निकाला। पर मछुआरे जिसे लाश समझ रहे थे वह एक जिंदा महिला थी। इस पूरी घटना को मछुआरों की टोली में से एक मछुआरे ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया। जब मछुआरो ने देखा कि महिला जिंदा है और बहुत ही नाजुक हालत में है तो उसे आनन-फानन में स्थानीय अस्पताल लेकर भागे। जहां डॉक्टरों ने गर्म कपड़ों और हीटर की मदद से उसे बचा लिया, या यूं कहें कि नई जिंदगी दी।

कहा जाता है जाको राखे साइयां मार सके ना कोय इसी की जीती जागती मिसाल है यह महिला अनिता देवी और इंसानियत की मिसाल है वो मछुआरे, जो कि फरिश्ते बनकर आए और एक अनजान महिला अनिता देवी की जान बचाई। वरना आजकल तो ऐसे एक्सीडेंट या अनोहनी होने पर लोग मदद की जगह मोबाइल से वीडियो बनाने में लग जाते हैं या फिर बचकर निकल जाते हैं।

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