Scam 2003 : क्यों अब्दुल करीम तेलगी फिरसे बना चर्चा का विषय ?

After the success of superhit web series scam 1992 now the sequel scam 2003 is coming soon

स्कैम 1992 वेब सीरीज़ सुपरहिट होने के बाद स्कैम 2003 आ रही है बहुत जल्द, जिसके लिए अभी से ही सोशल मीडिया में बवाल मचा हुआ है जो 1992 के स्कैम से भी बहुत बड़ा स्कैम था। जिसमे अब्दुल करीम तेलगी का किरदार सुनने में आया है खुद प्रतीक गाँधी निभाएंगे। इस वजह से फिर से अब्दुल करीम तेलगी की कहानी में लोग फिरसे दिलचस्पी ले रहे है।

बतादे अब्दुल करीम का जन्म 29 जुलाई 1961 में हुआ था। उनके  पिता रेलवे में काम करते थे। अपने काम के वजह से उनको और उनके पूरे परिवार को कर्नाटक के  खानापुर रहना पड़ा। वही पर अब्दुल करीम तेलगी पले-बड़े। जब इनकी उम्र 7-8 वर्ष की थी, उसी दौरान उनके पिता की डाईबेटिस और अन्य बीमारियों के कारण मृत्यु हो गयी थी।

अब्दुल करीम तेलगी के और भी भाई थे ,अब्दुल अज़िम तेलगी और अब्दुल रहीम तेलगी। पिता के गुज़र जाने के बाद तीनो भाई मिलकर खानापुर के रेलवे स्टेशन पर फल बेचते थे। उस समय खानापुर स्टेशन पर 10-12 ट्रेने रुकती थी, और इसी वजह से उनकी रोज़ी रोटी चल जाती थी।

अपनी स्कूलिंग ख़तम करने के बाद अब्दुल करीम तेलगी ने गोगटे कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स से B.Com करी। ग्रेजुएशन ख़तम करने उन्हें नौकरी ढूंढ़ने में परेशानी होने लगी। उनको जब पता चला मुंबई में नौकरी की कोई कमी नहीं है ,तो वो मुंबई चले गए और मुंबई  जाते ही उन्हें फिलिक्स इंडिया में  एग्जीक्यूटिव का काम मिला। उनका टारगेट पूरा न होने के कारण उनको कंपनी छोड़नी पड़ी। कंपनी छोड़ने के बाद उन्होंने किशन गेस्ट हाउस मुंबई में मैनेजर की नौकरी करी ,वहा पर भी कुछ अच्छा काम न होने के कारण मैनेजर की  नौकरी भी छोड़नी पड़ी।

उनको और पैसे कमाने थे इस वजह से वो सऊदी अरब चले गए  और वहा पर भी कई नौकरी करने के बाद और कई नौकरिया छोड़ने के बाद वापिस मुंबई आ गए।

मुंबई आके उन्होंने अरेबियन मेट्रो ट्रेवल कंपनी शुरू करी और यह कंपनी लोगो की डाक्यूमेंट्स में छेड़-छाड़ करके उनके इमीग्रेशन में मदद करता था। उसमे उन्होंने बहुत पैसे कमा लिए थे। यह काम भी ज्यादा समय तक नहीं चला जब इमीग्रेशन ऑफिशल्स ने उन्हें रंगे हाथो पकड़ा।

इमीग्रेशन एक्ट के चीटिंग करने के तहत कुछ टाइम उन्हें जेल में बिताना पड़ा और जेल में ही उन्हें रतन सोनी मिले जो स्टॉक एक्सचेंज में थे और वहा कई फ्रॉड करने के कारण उन्हें जेल में कुछ दिन गुज़ारने पड़े। रतन सोनी ने ही स्टाम्प पेपर स्कैम का विचार उनके सामने रखा था।

जेल से निकलने के बाद उन्होंने इस पर काम करना शुरू किया और 1994 में स्टाम्प वेंडिंग लाइसेंस लिया जिससे लोगो को उनपर कोई संदेह ना हो जब वो नकली स्टाम्प पेपर बेचना शुरू करे। साथ ही नाशिक में  इंडियन सिक्योरिटी प्रेस है जहा  स्टाम्प पेपर छपते थे और जब वहा स्टाम्प वेंडिंग मशीन पुराणी हो जाती थी, तब उन मशीनो की नीलामी होती थी और अब्दुल करीम तेलगी ने उसको खरीदना शुरू किया।

इंडियन सिक्योरिटी प्रेस में उन्होंने कई लोगो से संपर्क बनाने शुरू करे, जिससे उन्होंने स्टाम्प पेपर में इस्तेमाल होने वाले ज़रूरी सामान जैसे इंक ,स्पेशल पेपर और स्टाम्प पेपर प्रिंट करने के कई ज़रूरी सामान का इंतज़ाम किया। प्रिंट होने वाले स्टाम्प पेपर में बस इतना फर्क था की असली पेपर गवर्नमेंट प्रिंट कर रही थी और नकली पेपर खुद अब्दुल करीम तेलगी कर रहा था।

यह कई साल तक चलता रहा लेकिन साल 2000 में जब बेंगलुरु पुलिस  ने छापा मारा, तब से सब बिगड़ने लगा और ये बात इतनी गंभीर थी कि इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम(SIT) को काम करना पड़ा और यह स्कैम 2003 तक सबके सामने था जिसमे उन्होंने 3000 स्टाम्प पेपर का स्कैम करा और यह करीब 22000 करोड़ का स्कैम था। जिसमे अनिल गोते जैसे कई बड़े नाम शामिल है।

अब्दुल करीम तेलगी की मौत जेल में ही हुई थी मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के वजह से इसी तरह हर्षल मेहता की भी जेल में मौत हुई थी जो अभी भी कई लोगो को लगता है की उन्हें मारा गया है क्योकि इस स्कैम में कई लोग जुड़े हुए थे।

Show More

Related Articles

Back to top button