इन 4 बैंकों का होगा निजीकरण, सरकारी बैंकों की संख्या 12 से 5 करने की तैयारी

अगर आप इन 4 सरकारी बैंक्स से किसी भी मायने में जुड़े हैं तो आपको बता दें की इन बैंक्स का निजीकरण होने वाला है, कौन से होंगे ये बैंक पढ़िए ये पूरी खबर

एक तरफ खेतों का निजीकरण न होने के लिए किसान देश भर की प्रादेशिक सीमाओं पर अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहा है तो वहीँ दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने हर प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने की ठान ली है जिनमें से एक बैंकिंग प्रणाली भी है। ये खबर बैंकिंग प्रणाली के लिए एक काफी चौंका देने वाली खबर साबित हो सकती है साथ ही प्राइवटाइज़ड होने वाले इन बैंक्स में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए भी ये एक काफी बड़ी खबर है। जिसके मुताबिक़ सरकार ने लगभग 4 बैंकों का निजीकरण यानी प्राइवेटाइज़ेशन करने का फैसला लिया है।

इन बैंकों की लिस्ट में, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ इंडिया, ओवरसीज़ बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया शामिल हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें की सिर्फ यही बैंक नहीं हैं जिनका प्राइवेटाइज़ेशन होने वाला है। बल्कि सरकार एक काफी बड़ा प्लान बना रही है जिसके चलते काफी सेक्टर्स को प्राइवटाइज़ड कर दिया जाएगा। अब बैंकिंग सेक्टर में सरकार के इस बड़े प्लान के मुताबिक़ वो सरकारी बैंकों को बेचकर राजस्व कमाना चाहती है ताकि उस पैसे का उपयोग सरकारी योजनाओं पर हो सके। सरकार बड़े लेवल पर प्राइवेटाइजेशन करने का प्लान बना रही है।

फिलहाल बैंकिग सेक्टर में हजारों कर्मचारी काम करते हैं इसलिए अगर बैंक्स का प्राइवेटाइज़ेशन हुआ तो यह एक जोखिम भरा काम है क्योंकि इससे बैंक में काम करने वाले कर्मचारियों पर बहुत गहरा असर हो सकता है। उनकी सैलेरी पर गाज गिर सकती है जो प्राइवेटाइज़ेशन होने के बाद हर मायने में संभव है। अब निर्मला सीथारमन ने इस बात का ऐलान बजट 2021 में भी किया की सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी का निजीकरण किया जाएगा क्योंकि इस समय केंद्र सरकार विनिवेश पर अधिक ध्यान दे रही है।

इसके साथ ही भारत पेट्रोलियम में विनिवेश यानी डिसइनवेस्टमेंट की योजना बनाई जा रही है। अब यहाँ एक काफी बड़ा पहलु है जिस पर ध्यान देना काफी ज़रूरी है की बैंकिंग सेक्टर में बीते तीन सालों में बैंकिंग मर्जर यानी विलय और प्राइवेटाइज़ेशन यानी निजीकरण के चलते सरकारी बैंकों की संख्या 27 से 12 ही रह गई है, जिस संख्या को केंद्र सरकार इस privatization के ज़रिये 12 से 5 करने की तैयारी में है, जिसके लिए नीति आयोग ने ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया है।

अब 12 सरकारी बैंक में कौन कौन से बैंक बचे हैं ?
>> भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI
>> सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
>> बैंक ऑफ इंडिया
>> बैंक ऑफ महाराष्ट्र
>> यूको बैंक
>> पंजाब एंड सिंध बैंक
>> इंडियन ओवरसीज बैंक
>> बैंक ऑफ बड़ौदा + देना बैंक + विजया बैंक
>> पंजाब नेशनल बैंक + ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स + यूनाइटेड बैंक
>> केनरा बैंक + सिंडिकेट बैंक
>> यूनियन बैंक ऑफ इंडिया + आंध्रा बैंक + कॉरपोरेशन बैंक
>> इलाहाबाद बैंक + इंडियन बैंक

तो इन बैंक्स में फ़िलहाल 4 बैंक्स के privatized होने की बारी आ गयी है देखते ही देखते सरकार बाकि के किन 4 बैंक्स को privatized करती है ये देखना ज़रूरी होगा क्यूंकि इन बैंक्स के privatized होने से न सिर्फ अप्रत्यक्ष तौर पर सरकारी सम्पत्ति निजी हाथों को सौंपी जाने वाली है बल्कि इन बैंक्स में काम करने वाले कर्मचारियों की ज़िंदगी की कमान भी निजी हाथों को दे दी जाएगी जो अपने हिसाब से बैंकिंग प्रणाली को, इन बैंक्स को, या इसमें काम कर रहे कर्मचारियों की ज़िंदगी को निगलेंगे और कोई कुछ नहीं कर पाएगा क्यूंकि सरकार ने देश के सेक्टर्स की कमान पूंजीपतियों के हाथ सौंपने की ठान ली है।

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