लोन ईएमआई वालों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत

लॉकडाउन के दौरान जिन ग्राहको ने बैंको से मोरेटोरियम अर्थात ऋण स्थगन सुविधा ली थी, उनमें से कई ग्राहक अब इस मोरेटोरियम (Moratorium) की अवधि को बढ़ाने और ब्याज में छूट देने की मांग कर रहे हैं। इसी पर कई ग्राहको ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई में क्या कुछ रहा वो आपको बताने से पहले आपको बता दें कि ये पूरा मामला क्या है। साथ ही बताते है कि कोर्ट में किसने क्या दलीले दी।

दरअसल आरबीआई ने लॉकडाउन को देखते हुए मार्च में 3 महीने के लिए मोरेटोरियम की सुविधा दी थी, फिर इसे 3 महीने और बढ़ाकर अगस्त तक कर दिया था और अब 31 अगस्त को मोरेटोरियम सुविधा की अवधि खत्म हो गई है तो अब जब मोरेटोरियम के 6 महीने पूरे हो चुके हैं, तो ग्राहक कह रहे हैं कि इसे और बढ़ाना चाहिए। साथ ही मोरेटोरियम पीरियड का ब्याज भी माफ होना चाहिए। क्योंकि यहां बैंक ग्राहको से ईएमआई के ब्याज पर भी ब्याज यानि चक्रवरधि ब्याज ले रहे है, , जिससे ग्राहको पर दोहरी मार पड़ रही है।

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अब आपको बताते हैकि इसमें ग्राहक क्या दलीले पेश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में ग्राहकों के एक ग्रुप और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के महाराष्ट्र चैप्टर की तरफ से सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि “मोरेटोरियम नहीं बढ़ा, तो कई लोग लोन पेमेंट में डिफॉल्ट करेंगे। इस मामले में एक्सपर्ट कमेटी को सेक्टर वाइज प्लान तैयार करना चाहिए।” और देखा जाए तो सही भी कहा क्योकि लॉकडाउन का हर सैक्टर पर अलग अलग तरह से प्रभावित हुआ है।

वहीं रियल स्टेट डेवलपर्स का संगठन क्रेडाई ने कोर्ट में दलील दी थी कि आने वाले समय में नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानि एनपीए बढ़ सकते हैं। “इसके अलावा शॉपिंग सेंटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि “कोरोना की वजह से लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। उन्हें राहत देने के उपाय किए जाने चाहिए। आरबीआई सिर्फ बैंकों के प्रवक्ता की तरह बात नहीं कर सकता। हमारी स्थिति वाकई खराब है। थिएटर, बार और फूड कोर्ट बंद हैं। हम कैसे कमाएंगे और कर्मचारियों को सैलरी कैसे देंगे? कोर्ट से अपील करते हैं कि सेक्टर वाइज राहत देने पर विचार होना चाहिए।” जिसके बाद सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार यानि 2 सितंबर को कोर्ट में कहा, “ब्याज माफ किया तो बैंकों की स्थिति खराब होगी। देश में अलग-अलग तरह के बैंक हैं। नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (एनबीएफसी) भी इनमें शामिल हैं।”

इससे पहले मंगलवार को सरकार ने कहा था कि कोरोना की स्थिति को देखते हुए मोरेटोरियम पीरियड 2 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। सरकार का यह जवाब इसलिए आया, क्योंकि 26 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि इस मामले में 7 दिन में स्थिति साफ की जाए। कोर्ट ने कमेंट किया था कि सरकार आरबीआई के फैसले की आड़ ले रही है, जबकि उसके पास खुद फैसला लेने का अधिकार है।

अब आपको बताते है कि आज हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील रखी- उन्होंने कहा कि, “ब्याज में छूट नहीं दे सकते, लेकिन पेमेंट का दबाव कम कर देंगे। बैंकिंग सेक्टर इकोनॉमी की रीढ़ है। हम अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला कोई फैसला नहीं ले सकते।”कोर्ट ने बैंकों से कहा “जिन ग्राहकों के खाते 31 अगस्त तक नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) घोषित नहीं किए गए, तो उसे अगले दो महीने तक भी एनपीए घोषित न किया जाए। साथ ही जो ग्राहक इस समय लोन ना चुकाने उन पर जबरन कोई कख्त कारर्वाई ना करें।

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दरअसल एनपीए में कोई ग्राहक तब आता है जब वह किसी लोन की ईएमआई लगातार तीन महीने तक न जमा कराए। अगर ऐसा होता है तो बैंक उसे एनपीए यानी गैर निष्पादित परिसंपत्ति घोषित कर देते हैं।वही दूसरी तरफ जो पिछले सोमवार को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में कहा कि मोरेटोरियम को दो साल तक बढ़ाया जा सकता है। लेकिन यह कुछ ही सेक्टर को मिलेगा। वहीं ब्याज पर ब्याज के मामले पर रिजर्व बैंक निर्णय लेगा। सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘हम ऐसे सेक्टर की पहचान कर रहे हैं जिनको राहत दी जा सकती है, यह देखते हुए कि उनको कितना नुकसान हुआ है।’ इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अब और देर नहीं की जा सकती। बता दें कि अब अगली सुनवाई 10 सिंतंबर को होगी।अब देखना ये होगा कि अगली सुनवाई में किन सेक्टर में लोगों को राहत मिलती है।

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Sarita Tiwari

An human being, a social worker by heart but professionally I am a journalist.

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