दीप सिद्धू को पुलिस ने किया गिरफ्तार, करनाल की सड़क से धर दबोचा

किसान आंदोलन के तहत ट्रैक्टर रैली में हुई हिंसक झड़प को अंजाम देने वाले आरोपी, दीप सिद्धू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी भी अपना गुनाह नहीं कर रहा क़ुबूल

देश में किसान आंदोलन जारी है। आंदोलन को ख़त्म करने की तमाम कोशिश अभी तक की जा चुकी हैं। 26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में किसान आंदोलन के तहत ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसक झड़प को अंजाम दिया गया जिसके बाद किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया गया। इस हिंसक झड़प को अंजाम देने वाले कई आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है जिनमें एक नाम दीप सिद्धू का भी था। दीप सिद्धू के खिलाफ किसानों को भड़काने के आरोप में शिकायत दर्ज की गयी है। कई दिनों से पुलिस दीप सिद्धू को ढूंढने में जुटी हुई थी क्यूंकि हिंसा वाले दिन से ही सिद्धू फरार था।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल टीम ने इस बात की जानकारी दी है की कल यानी 8 फरवरी को रात 10:30 बजे डीप सिद्धू को करनाल से गिरफ्तार किया गया है। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई कर रही है इसलिए सिद्धू को क्राइम ब्रांच के हवाले सौंप दिया जाएगा।पुलिस द्वारा दी गयी जानकारी के मुताबिक़, सिद्दू अकेले रास्ते पर खड़ा था और कार का इंतज़ार कर रहा था, इसी दौरान पुलिस की आईटी सेल टीम वहां पहुंची और उसने सिद्धू को धर दबोचा।

पुलिस को दीप सिद्धू की जानकारी उसके फेसबुक अकाउंट से मिल रही थी, क्यूंकि बेशक सिद्धू 26 जनवरी के बाद से ही फरार था लेकिन अपने फेसबुक अकाउंट पर लगातार अपनी बेगुनाही भरे सुबूत डालकर उसने अपने ही पैरों पर कुलाहड़ी मार ली। हालांकि सूत्रों के हवाले से ये पता चला है की सिद्धू की एक महिला मित्र सहित उसके कुछ दोस्त ही उसका सोशल मीडिया अकाउंट, विदेश में बैठे बैठे हैंडल कर रहे थे। जिनमें से महिला ने सिद्दू को निर्दोष बताया है।

सिद्धू ने अभी भी अपना गुनाह कुबूल नहीं किया है और पुलिस के पूछे जाने पर भी उसने इस बात से इंकार कर दिया की वो किसानों को भड़का रहा था। जबकि दीप सिद्धू की जो वीडियो वायरल हुई थी उसमें साफ नज़र आ रहा था की वो किस कदर हिंसा फैलाने के लिए किसानों को भड़का रहा है।इतना पुख्ता सुबूत देखने के बावजूद सिद्धू ने अपने गुनाह कुबूल नहीं किये हैं।

ऐसे में अब इंतज़ार इसी बात का है की सिद्धू को सजा मिलती है या नहीं ? और अगर मिलती भी है तो कब तक ? क्योंकि ऐसे आरोपियों को अगर सजा नहीं दी गयी तो बड़े [पैमाने पर अपना हक़ मांगने के लिए सड़कों पर बैठे किसानों की मेहनत और इतने दिनों के बलिदान पर पानी फिर जाएगा।

 

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