मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, आरबीआई का फैसला नहीं लगा कारगर

कोरोनाकाल में आर्थिक संकट के चलते मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी है। जानिये इस याचिका में क्या कुछ कहा गया।

मोरेटोरियम पर एक बार फिर सांसे अटक गयी हैं क्यूंकि इस महामारी की दूसरी लहर ने एक बार फिर लोगों की जेब पर असर डाला है। ऐसे में आरबीआई का मोरिटोरियम पर फैसला उतना कारगर नज़र नहीं आ रहा था जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट में फ्रेश मोरेटोरियम देने के लिए याचिका दायर की गयी है। याचिका में उन ग्राहकों को भी राहत देने की बात कही गयी है जो एकाउंट्स एनपीए हो गए हैं। साथ ही 6 महीने की इस राहत में किसी भी व्यक्ति की प्रॉपर्टी या कोई भी निकाय संपत्ति ज़ब्त न की जाए। याचिका में कहा गया है की केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय या फिर आरबीआई मोरेटोरियम के मामले में राहत देने में फेल साबित हुई है इसलिए सुप्रीम कोर्ट ही इस मामले में कोई फैसला ले।

इस याचिका में मौलिक अधिकारों के हनन का हवाला देते हुए कुछ बातों पर गौर फरमाकर जल्द से जल्द फैसला लेने को कहा गया है।
1. प्रॉपर्टी टैक्स, फाइन और पेनल्टी लॉकडाउन के दौरान माफ़ होना चाहिए।
2. ECLG लोन के ज़रिये वेतन का भुगतान सीधा ट्रांसफर के ज़रिये किया जाए।
3. बिना ब्याज लिए कम से कम 2 साल का मोरेटोरियम मिले और इसे पूरी तरह से रोक दिया जाए। क्यूंकि पहले लॉकडाउन के बाद प्रिंसिपल अमाऊंट काफी बढ़ गया जो इस बार नहीं होना चाहिए।
4. ईसीएलजी लोन फिर से दिया जाना चाहिए। किराए, बिजली और फोन बिलों को भी कुछ समय के लिए वितरित होना चाहिए।
5. कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन के साथ टीकाकरण ड्राइव को तुरंत बढ़ाया जाना चाहिए।

आपको बता दें की लोन मोरेटोरियम के लिए आरबीआई का आदेश पहले आ चुका है। जिसमें आर बी आई ने एक राहत पैकेज का एलान किया है जिसका फायदा व्यक्तिगत लोन लेने वाले ग्राहक और एम् इस एम् इ उठा सकते है जिनके सर पर 25 करोड़ रुपये तक का क़र्ज़ है उन्हें इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी। जो लोग पहले मोरेटोरियम में इसका लाभ नहीं उठा पाए थे वे अब इसका फायदा ले पाएंगे। लेकिन आरबीआई का ये फैसला उतना कारगर नज़र नहीं आया है जिस वजह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतज़ार जारी है।

 

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