लोग बिना ऑक्सीजन, इलाज और दवाइयों के मर रहे हैं और सरकार गायब है!

आएगा तो मोदी ही, आएगा तो मोदी ही, मोदी मोदी मोदी… शुरुआत में बहुत नारे लगाए जा रहे थे इस नाम के और मोदी सरकार ने भी तो काफी कुछ वादे किये थे अपनी देश की जनता से। फिर तो जैसे देश की जनता के लिए उनके प्यारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भगवान् के सामान हो गए थे। देश के लोग उन्हें भगवान् की तरह पूजने लगे थे। आँख बंद करके अपने प्रधानमंत्री पर विश्वास करने लगे थे और एक ही बात कहते थे ‘मोदी है तो मुमकिन है’।

लेकिन आज वही लोग अपने भगवान् के  खिलाफ हो गए। कोरोना महामारी ने जबसे हमारे देश में दस्तक दी है तबसे ही देश के हालत सिर्फ बिगड़ते नज़र आ रहे है। बीच में ऐसा लग रहा था कि हमारा देश धीरे धीरे इस महामारी से उबर रहा है लेकिन अचानक से आई कोरोना की इस दूसरी लहर ने देश के हाल फिर बेहाल कर दिए। हज़ारो लोग आए दिन मर रहे है। देश में ऑक्सीजन सिलिंडर्स की कमी है, हॉस्पिटल  में बेड्स नहीं है। लोग जाए तो जाए कहा, करे तो करे क्या? सबसे ज़्यादा लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे है, देश में ऑक्सीजन सिलिंडर्स की इतनी कमी है कि हॉस्पिटल लोगो को एडमिट करने से भी इंकार कर रहे है।  देश की स्थिति इतनी भयावह हो गयी है, कहते है न आउट ऑफ़ कण्ट्रोल, वैसी ही स्थिति इस वक़्त हो गयी है।

आज जो देश के हालात है इन सब का ज़िम्मेदार,देश की जनता सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार को मान रही है। कल तक जो लोग मोदी जी के पुरे सपोर्ट में थे आज वही लोग मोदी जी के खिलाफ हो गए है। आए दिन देश की जनता मोदी जी से गुहार लगा रही है कि मोदी जी कुछ करिये आपकी जनता मर रही है लेकिन मोदी जी तो चुनाव में व्यस्त थे,रेलिया निकालने में बिजी थे। मोदी सरकार के राज़ में एक चीज़ काफी अच्छी हुई है कि बाहर के देशो से इंडिया के समपर्क अच्छे हुए है इसी वजह से आज इस मुश्किल घड़ी  में बहुत से देश इंडिया की मदद के लिए आगे आ रहे है। ऑक्सीजन सिलिंडर्स की कमी को देखते हुए बाहर के देशो से ऑक्सीजन सिलिंडर्स मंगवाए जा रहे है लेकिन फायदा क्या, इंडिया में आने के बाद तो उनकी कालाबाज़ारी शुरू हो जा रही है। ऐसे में आम जनता करे तो करे क्या, वो तो सिर्फ सरकार पर अपना गुस्सा निकाल सकती है।

अब बात यहाँ सिर्फ आम जनता की ही नहीं है जिन्होंने एकदम से अपना रुख बदल लिया। महाभारत के युधिष्ठिर रह चुके गजेंद्र चौहान और बॉलीवुड जगत के जाने माने अभिनेता अनुपम खेर को कौन  नहीं जानता। संयोग से दोनों ही मोदी सरकार के दौरान फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट,पुणे के चेयरमैन भी रह चुके है। अब इन दोनों ही अभिनेताओं के बदले बदले रुख को देखकर काफी कुछ समझ आता है। गजेंद्र चौहान ने अपने ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए लिखा था कि ‘गाय अपने मालिक से कितनी भी नाराज़ हो लेकिन रूठकर कभी कसाई के घर नहीं जाती। इसलिए हम मोदी जी के साथ ही है।’ मतलब वो बता रहे हैं कि ‘गाय’ यानी कि वह स्वयं ‘मालिक’ यानी मोदी जी से नाराज़ हैं पर इस वजह से ‘कसाई’ यानी विपक्ष के पास नहीं जाएंगे।

वही दूसरी तरफ अनुपम खेर ने अपने इंटरव्यू में कहा था कि ‘कही न कही केंद्र सरकार फिसली है, ये उनके लिए समझने का वक़्त है कि सिर्फ इमेज बनाने से ज़्यादा भी ज़िन्दगी में और बहुत कुछ है।’ उन्होंने कहा कि ‘मैं समझता हूँ कि बहुत सारे मामलो में आलोचना वैध है और मैं समझता हूँ कि सरकार के लिए ये अहम् है कि वो इस मौके पर ऊपर उठे और वो चीज़े करे जिसके लिए देश की जनता ने उन्हें चुना है। ऐसा कोई होगा जो प्रभावित नहीं होगा नदियों में शवों के बहने से लेकिन किसी और राजनितिक दल की ओर से इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना भी सही नहीं है।’

अनुपम खेर के इस बयान से एक बात तो साफ़ समझ आती है कि मोदी सरकार ने शुरुआत में जो वादे किये थे वो उन्हें निभाने में नाकाम रही। अब तो बस यही उम्मीद कर सकते है कि मोदी सरकार की आँख खुले और वो देखे की देश में क्या हो रहा है और देश की जनता के लिए कुछ करे।

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