1 अप्रैल से लागू होंगे नए श्रम नियम , सैलेरी बढ़ेगी या होगा नुकसान ?

29 केंद्रीय श्रम कानूनों में बदलाव करके और इन सबको मिलाकर 4 नए श्रम नियम तैयार हुए हैं

1 अप्रैल से आपकी सैलेरी पर पड़ेगा बड़ा असर, एक हफ्ते में  4 दिन काम और 3 दिन सैलेरी के साथ वीकेंड्स की सुविधा, तय समय से 15 मिनट ज़्यादा काम करने पर कम्पनी से मिलेगा ओवरटाइम, बेसिक सैलेरी में होगी बढ़ोतरी, इन सभी बदलावों के साथ आपकी सैलेरी को लेकरऔर भी बहुत कुछ बदलने वाला है, क्यूंकि 1 अप्रैल से सरकार लागू करने जा रही है नए श्रम नियम यानी new labor codes. 

Ministry of labor and employment ने 4 श्रम नियमों को अंतिम रूप दे दिया है, साथ ही इन 4 संहिताओं को राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलने के बाद अधिसूचित भी कर दिया गया है। लेकिन अभी इन नियमों के implementation के लिए notification ज़ारी नहीं किया गया है। लेकिन सरकार जल्द ही हर पहलु पर विचार विमर्श के साथ इन नए श्रम नियमों को लागू कर देगी। अगर ये codes लागू हुए तो हर कंपनी को अपने एम्प्लॉय की सैलेरी में बदलाव करने होंगे। लेकिन उस से पहले जान लीजिये की ये 4 नए labor codes कौन से होंगे।

  1. Occupational safety code यानी व्यावसायिक सुरक्षा कोड
  2. Health and working conditions code यानी स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां
  3. Industrial relation code यानी औद्योगिक सम्बन्ध
  4. Social security code यानी सामाजिक सुरक्षा।

तो ये चारों codes पुराने 29 केंद्रीय labor कानूनों को मिलाकर बनाये गए हैं जिनमें ग्रेच्युटी, सैलेरी restructure, बेसिक सैलेरी, आपके allowances, कम्पनी से मिलने वाला पीएफ, ये सभी नए बदलाव के साथ शामिल किये गए हैं।

तो इन codes में क्या नया होने वाला है ? ऐसे कौन से बदलाव हैं जो सरकार की नज़र में आपके लिए रिटायरमेंट के बाद फायदेमंद साबित होंगे, लेकिन आपको वर्तमान के हिसाब से वो सिर्फ घाटे का सौदा लग सकता है।

  • पहला है सैलेरी restructure

भारत की लगभग सभी इंडस्ट्रीज़ में बेसिक सैलेरी और allowance  शामिल होते हैं। आपकी बेसिक सैलेरी, कुल सैलेरी की 30 से 50% होती है। लेकिन नए नियमों के मुताबिक़ यहाँ 50-50 का सौदा होने वाला है। यानी आपका CTC “cost to company” आपकी बेसिक सैलेरी के बराबर रखा जाएगा। और आपके बाकि के allowances को भी आपकी बेसिक सैलेरी में ही add कर दिया जाएगा लेकिन ध्यान रहे की आपकी basic salary आपकी कुल सैलेरी के 50%से ज़्यादा नहीं हो सकती।

  • दूसरा है पीएफ

अब आपका जो पीएफ होता है वो आपकी बेसिक सैलेरी पर कैलकुलेट होता है। अगर आपकी बेसिक सैलेरी बढ़ती है तो ज़ाहिर सी बात है की पीएफ contribution भी बढ़ेगा और अगर आपका पीएफ contribution बढ़ेगा तो आपकी कम्पनी का भी पीएफ contribution बढ़ेगा। क्यूंकि पीएफ यानी प्रोविडेंट फंड में जितना अमाउंट आप अपनी सैलेरी से contribute करते हैं उतना ही amount आपकी कंपनी भी contribute करती है।

  • तीसरा है की आपकी In हैंड सैलेरी पर क्या असर पड़ेगा

तो आपकी in हैंड सैलेरी का मतलब हर महीने आपके अकाउंट में जमा होने वाला पैसा है । अब यहाँ आपको घाटे का सौदा महसूस होगा क्यूंकि आपकी इन हैंड सैलेरी घटने वाली है। आपको हमने पहले ही बताया की आपका पीएफ contribution बढ़ जाएगा तो ऐसे में इसका असर आपकी in हैंड सैलेरी पर पड़ेगा। हालांकि सरकार का मानना है की रिटायरमेंट के बाद आपको इस से अच्छी खासी सुविधा मिलेगी क्यूंकि ग्रेच्युटी बढ़ जाएगी। जो again बेसिक सैलेरी पर calculate की जाती है।

अब इस बीच एक सवाल भी उठता है की क्या ग्रेच्युटी देना ज़रूरी है ?

तो आपको बता दें की अगर बेसिक पे और आपकी कुल सैलेरी का रेश्यो 30 फीसदी के आसपास है और वेज कोड लागू होने के बाद इसे बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया जाता है तो ऐसे में कंपनियों पर दोगुना बोझ पड़ सकता है। इसलिए फिक्स्ड टर्म वाले कर्मचारियों को गेच्युटी देनी होगी, चाहे वो 5 साल की नौकरी पूरी करें या नहीं लेकिन यहाँ नए कोड से कर्मचारी हर साल के अंत में लीव एनकैशमेंट की सुविधा ले सकता है।यानी अगर आप अपनी लीव को इन कॅश करवाना चाहते हैं तो ये सुविधा भी आपको इन नियमों के तहत मिल सकती है।

अभी तक ग्रेच्युटी को बेसिक सैलेरी पर कैलकुलेट किया जाता था लेकिन अब ये वेज पर calculate की जाएगी। इन नए codes में वेज की एक ही परिभाषा दी गयी है जिस से confusion create न हो। इस परिभाषा के मुताबिक़, नए कोड्स में बेसिक पे, डीए, रीटेनिंग और स्पेशल भत्तों को वेज में शामिल किया गया है। एचआरए, कनवेंस, बोनस, ओवरटाइम अलावेंस और कमीशंस को इससे बाहर रखा गया है। नए नियम के तहत तमाम allowances कुल सैलरी के 50 फीसदी से अधिक नहीं हो सकते हैं। अगर यह 50 फीसदी से अधिक होते हैं तो बाकी बची राशि को वेज का हिस्सा माना जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है की क्या ये लेबर codes सिर्फ कुछ लिमिटेड professionals पर लागू होंगे ? तो आपको बता दें की ये नए लेबर कोड हर उस एम्प्लॉय, चाहें वो unskilled हो, स्किल्ड हो, सेमि स्किल्ड हो, manual, operational, supervisory, managerial, administrative, टेक्निकल हो या क्लेरिकल हो, इन क्षेत्रों में काम करने वाले हर एम्प्लॉय पर ये लेबर कोड लागू होंगे।

Show More

Related Articles

Back to top button