मोदी सरकार का कैशलेस इकॉनमी का सपना चूर

भारत में नोटबंदी के बाद दूसरी कोरोना लहर में सबसे ज्यादा नकदी का इस्तेमाल किया गया है!

Modi Government’s dream of Cashless Economy of India is Declining | Demonetisation | Notebandi – Spark News

मोदी सरकार का कैशलेस इकॉनमी का सपना टूटता नज़र आ रहा है! 2016 में डिमौनिटाइज़ेशन के ज़रिए डिजिटल इंडिया और कैशलेस इकॉनमी का सपना संजोया गया था लेकिन अब यही सपना चूर चूर हो गया है! क्योंकि 2020-21 के दौरान देश में नकदी का इस्तेमाल जीडीपी के 14.7 फीसदी तक चला गया है जो अभी तक का सबसे बड़ा रिकार्ड साबित हुआ है! आपको बता दें कि जिस साल में नोटबंदी हुई उस साल में कैश जीडीपी रेशियो काफी कम था लेकिन साल 2020-21 में यही रेशियो बढ़ चुका है!

वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान देश में नकदी का इस्तेमाल GDP  के 14.7 प्रतिशत तक चला गया है ! आरबीआई के मुताबिक यही आंकड़ा पहले 12 प्रतिशत से कम रहा है!

साल 2016 में पीएम मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था तभी से सरकार की कोशिश थी कि नकदी का इस्तेमाल कम से कम हो और डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़े ! ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, कार्ड, यूपीआई से ट्रांजैक्शन बढ़ाने की पहल की गई!

नोटबंदी की वजह से साल 2016-17 में नकद-जीडीपी रेशियो महज 8.67 प्रतिशत रह गया था! लेकिन यह गिरावट थोड़े समय की साबित हुई! साल 2019-20 में कैश जीडीपी रेशियो बढ़कर 12.03 फीसदी पहुंच गया! अब यह रिकॉर्ड लेवल 14 प्रतिशत के पार पहुंच गया है! कैश-जीडीपी अनुपात बढ़ने की एक वजह यह भी है कि साल 2020-21 में नकदी के चलन में 17.2 फीसदी की बढ़त हुई है, जो कि एक साल पहले 14 फीसदी ही था! नोटबंदी के पहले देश में सर्कुलेशन में रहने वाली कुल नकदी 16.63 लाख करोड़ रुपये की थी, जो 2020-21 में बढ़कर 28.60 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई! दूसरी तरफ साल 2020-21 में कोविड की वजह से जीडीपी में काफी गिरावट आई ! जानकारों का अनुमान है कि अभी कुछ समय तक कैश-जीडीपी अनुपात ज्यादा ही रहेगा!

गौरतलब है कि आरबीआई के मुताबिक सर्कुलेशन में रहने वाले करेंसी नोट में से सबसे ज्यादा 31.1 प्रतिशत हिस्सा 500 रुपये के नोट का है ! इसके बाद 23.6 फीसदी हिस्से के साथ 10 के नोट दूसरे स्थान पर हैं!

 

Show More

Related Articles

Back to top button