जानिये, क्या है पोक्सो एक्ट और किसे मिलता है इसका फायदा ?

क्या आप पोक्सो एक्ट के बारे में जानते हैं या फिर आये दिन बच्चों के साथ होने वाले दुष्कर्म और छेड़ छाड़ के मामलों से तो जरूर अवगत होंगे। इसी तरह के मामलो को रोकने के लिए सन 2012 में एक एक्ट पास हुआ जिसे पोक्सो एक्ट 2012 के नाम से जाना जाता है।

जिस तरह से बच्चों के साथ दुष्कर्म के रोज़ नए मामले सामने आते हे और पीड़ित के माता पिता या परिजनों को ये पता नहीं होता की उन्हें क्या करना चाहिए या किसकी मदद लेनी चाहिए तो ये जानकारी उनके लिए मददगार साबित होगी ! सन 2012 में इस तरह के बढ़ते मामलों को रोकने लिए एक अधिनियम पास किया जिसका नाम हे ‘प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ओफ्फेंसेस एक्ट 2012’ यानि लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध यानि सेक्सुअल हर्रास्मेंट सेक्सुअल असाल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान की गई है !

18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ किसी भी तरह का यौन अपराध इस कानून के दायरे में आता हे और उसके लिए इस कानून के अंतर्गत सजा का प्रावधान भी है और इसके लिए अलग अलग यौन अपराधों को परिभाषित कर उनके लिए अपराध के अनुसार दंड तय किया गया है जैसे धारा 4 के अंतर्गत यदि बच्चे के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया गया हो तो 7 साल से लेकर उम्र कैद तथा अर्थदंड शामिल है धारा 6 के अंतर्गत वह मामले आते हे जिसमे बच्चे से दुष्कर्म के बाब उसे गंभीर चोट आई हो इस धरा में 10 साल से लेकर उम्रकैद तक शामिल है और जुरमाना भी लगाया जा सकता है इसी तरह धरा 7 और 8 के तहत वो मामले आते हैं जिनमे बच्चों के गुप्तांग के साथ छेड़ छाड़ की जाती है जिसमे दोष सिद्ध हो जाने पर दोषी को 5 से 7 साल की सजा वो जुरमाना भी हो सकता है धरा 3 के अंतर्गत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल ओफ्फेंस को परिभाषित किया गया है और दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया हे ! इस अधिनियम के अंतर्गत लड़के और लड़की दोनों की ही सुरक्षा प्रदान की गई है !

इस तरह का कोई भी मामला अगर सामने आता है तो विशेष किशोर पुलिस यूनिट या स्थानीय पुलिस को इसकी सुचना देनी होगी जो सेक्शन 19 में निहित है परन्तु किसी भी माध्यम से बच्चों /पीड़ित की पहचान निर्बाद्य की गई है परन्तु ये बड़ा ही दुखद हे की इतने कड़े कानून के बाद भी ये अपराध नहीं रुके और सन 2019 में इस अधिनियम में संशोधन करना पड़ा और 12 साल तक के बच्चों के साथ दुष्कर्म के लिए उम्रकैद और प्राण दंड की सजा निर्धारित की गई और हर रोज़ उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के अलग अलग वर्डिक्ट आते रहते है ! आज हमारे समाज में जागरूकता की परम अव्यश्य्कता है ताकि वे इस तरह के अपराध और अपराधियों को पहचान उनके साथ उचित कार्यवाही कर सके और बच्चों को ऐसे अपराधों का शिकार होने से बचा सके तभी हमारे बच्चों का और हमारे देश का भविष्य सुरक्षित होगा !

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