लोन मोराटोरियम नहीं तो ये है दूसरा विकल्प

लोन मोराटोरियम पर आज की सुनवाई में भी कोई फैसला निकलकर नहीं आया, अगली तारिख 12 फरवरी की दी गयी है।

कोरोना काल के बाद आर्थिक मंदी की वजह से सभी की निगाहें लोन मोराटोरियम पर टिकी हुई है सवाल यही है की लोन मोराटोरियम मिलेगा या नहीं जिस पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज की तारीख तय की थी । लेकिन आज की सुनवाई में भी कोई फैसला निकलकर नहीं आया तो अगली तारिख 12 फरवरी की दी गयी है।

लेकिन उस से पहले जान लीजिये की मोराटोरियम आखिर है क्या ? तो मोटरेटोरियम एक बैंकिंग प्रोसीजर है जिसमें लोन लेने वाला व्यक्ति अगर किसी आर्थिक मंदी की वजह से लोन की भरपाई नहीं कर पा रहा है तो उस लोन को चुकाने के लिए एक समय अवधि तय कर दी जाती है। यानी आपके ईएमआई भरने की समय अवधि को बढ़ा दिया जाएगा जिस से आपको अपना लोन चुकाने के लिए बैंक की ओर से थोड़े समय की राहत मिल जाएगी। लेकिन मोराटोरियम मिलेगा या नहीं ? सुई यहीं आकर अटक जाती है। अभी अभी पूरा देश कोरोना महामारी से बाहर आया है ऐसे में सबका कारोबार ठप्प पड़ गया है। उसके बावजूद भी कई बैंक्स ने लोगों से भारी ईएमआई पर भारी ब्याज़ वसूला है जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है।

लेकिन सवाल यह भी है की अगर मोराटोरियम नहीं मिला तो दूसरा क्या ऑप्शन है जिस से लोन लेने वाले लोगों को राहत मिल सकती है। देखिये मोराटोरियम पर फ़िलहाल फैसला नहीं आया है और अगर मोराटोरियम के लिए कोर्ट फैसला सुनाता भी है तो भी टर्म लोन पर मिलने वाले ब्याज पर और जो बिज़्नेस कमपनीज़ है उनके लोन पर राहत मिलेगी तो यहाँ बाकी के लोन्स जिन्होंने लिए हैं उनके लिए मोराटोरियम फायदेमंद है ? ये सबसे बड़ा सवाल है। ऐसे में अगर आपको याद हो तो कोरोना महामारी के दौरान ही आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें सभी बैंक्स को ये इंस्ट्रक्शंस दिए गए थे की जो ग्राहक फाइनेंशियल क्राइसिस का सामना कर रहे हैं उनके लोन को रिस्ट्रक्ट कर दिया जाएगा। यानी अगर आप पैसों की परेशानी का सामना कर रहे हैं तो आप अपने लोन को रिस्ट्रक्ट करवा सकते हैं।

अब रीस्ट्रक्शंस ऑफ़ लोन्स क्या है? रीस्ट्रक्शंस ऑफ़ लोन्स में आप अपनी ईएमआई की समय अवधि को जब तक आप चाहें तब तक बढ़ा सकते हैं। जैसे अगर आपकी ईएमआई 10 हजार महीने की है, आपने 4 महीने अपनी EMI नहीं भरी है और आपका लोन का समय 5 साल बाकी है तो बैंक आपकी यह 4 महीने की ईएमआई उसी 5 साल में बांट देगा। यही नहीं अगर आप चाहते हैं कि आपकी ईएमआई की राशि कम हो जाए तो आप बैंक से अपने कर्ज भरने की समय सीमा बढ़वा सकते हैं। इससे आपको यह फायदा होगा कि आपकी मासिक ईएमआई कम हो जाएगी। अब अभी तक तो बैंक्स में कॉर्पोरेट लोन्स ही रीस्ट्रक्ट होते थे लेकिन आरबीआई के आदेश के बाद आप कार लोन, होम लोन,पर्सनल लोन्स, किसी भी तरह की रीस्ट्रक्टिंग करवा सकते हैं। इसमें एक और फायदा ये है की बैंक आपसे ज़बरदस्ती कोई ईएमआई की राशि वसूल नहीं कर पाएगा। हालांकि मोराटोरियम के केस में भी सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है की कोई भी बैंक अपने ग्राहक से ज़बरदस्ती लोन की राशि वसूल नहीं कर सकता है।

अब एक सवाल ये भी उठता है की रीस्ट्रक्शन और मोराटोरियम में अंतर क्या है। तो आपको बता दें की बैंकिंग प्रक्रिया में ये दोनों एक जैसी ही सुविधाएं है बस फर्क सिर्फ इतना है की मोराटोरियम में कोर्ट के फैसले के बाद जितनी अवधि तय की जाएगी, आपको सिर्फ उस समय तक ही अपना लोन चुकाने के मामले में राहत मिल सकती है जबकि रीस्ट्रक्शन ऑफ़ लोन्स में ऐसा नहीं होगा। इसमें आप जितने समय अवधि तक चाहे अपनी ईएमआई की समय सीमा को बढ़ा सकते हैं। आरबीआई की तरफ से रीस्ट्रक्शंस ऑफ़ लोन्स की आखिरी अवधि का ऐलान तो नहीं किया गया है लेकिन पिछली बार जब इसकी समय अवधि का ज़िक्र किया गया था तो इसे 2 साल तक रखने की घोषणा की गयी थी। लेकिन एक बात ज़रूर ध्यान रखियेगा की रीस्ट्रक्शन का मतलब ये बिलकुल नहीं है की आपकी ईएमआई पर लगने वाला ब्याज़ कम हो जाएगा? ऐसा नहीं होगा। इस प्रक्रिया से आपके लोन की जो समय अवधि है उसे आप लम्बे समय तक बढ़ा सकते हैं। हालांकि क्रेडिट कार्ड होल्डर्स को दोनों ही मामलों में राहत मिलने की कोई गुंजाइश नज़र नहीं आ रही क्योंकि क्रेडिट कार्ड्स पर फ़िलहाल कोई ऐलान नहीं किया गया है।

इसलिए अगर मोराटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाता है जो जनता के पक्ष में होता है तो काफी बड़ी खुशखबरी साबित हो सकती है लेकिन अगर फैसला आपके पक्ष में नहीं भी होता है तो घबराइयेगा मत, आप अपने बैंक में जाइये और बैंक अधिकारी से कहिये की आपको अपना लोन कुछ समय के लिए रीस्ट्रक्ट करवाना है वो आपको पूरा बता देगा।

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