बेटियों पर बढ़ते जुल्म को रोकने में नाकाम है सरकार

उत्तर प्रदेश के हाथरस की बर्बर व दिल दहला देने वाली घटना ने देश को ही नही दुनिया को हिलाकर रख दिया है। चारो ओर गुस्से, आक्रोश, तीखे सवालों से घिरे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अब कई दिनों बाद पीड़ित परिवार से बात की है। जिसके बाद पीड़ित परिवार को पच्चीस लाख की आर्थिक सहायता राशि देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और परिवार को एक घर भी आवंटित करने की बात कही गई है, सीएम ने मामले में न्याय दिलाने का वादा भी किया है, जिसके लिए एसआईटी बना दी गई है. चारों आरोपी पहले ही पकड़े जा चुके हैं। लेकिन जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनके परिवार वालों को कहना है कि आरोप झूठे हैं। दोनों परिवारों के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी का हवाला दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के इस हाथरस गैंगरेप कांड की आग अभी बुुझी भी नही है कि बलरामपुर में भी एक दलित बेटी की अस्मत लूट ली गई। आरोपियों ने इस पीड़िता की कमर और पैर तोड़ दिए। जिससे वह चलने फिरने लायक नहीं रह गई थी, बाद में उसकी दुःखद मौत हो गई। इस मामले में भी हाथरस की तरह ही पुलिस ने संवेदनहीनता दिखाई है। जिस तरह हाथरस गैंगरेप पीड़िता का शव रात में जबरन जलाया गया। इसी तरह बलरामपुर की दुष्कर्म पीड़िता का भी पुलिस ने रात में ही आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर दिया। भारी पुलिस बल की तैनाती में देर रात पीड़िता का शव जलाए जाने से लोगों में भारी आक्रोश है।

हाथरस की बेटी से गैंगरेप और मौत के मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार, राज्य के पुलिस मुखिया को इस मामले में नोटिस जारी किया है। आयोग ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। विदित हो 19 साल की दलित बेटी के साथ कुछ दिनों पहले गैंगरेप की घटना हुई थी, उसकी जीभ काट दी गई थी और उसकी रीढ़ की हड्डियां तोड़ दी गई थीं। जिसके बाद वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी मौत से जूझ रही थी। लगभग 15 दिनों बाद पीड़िता मनीषा की मौत हो गई। जिसके बाद से आक्रोश का बवंडर जारी है। जिसके बाद ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हाथरस जिले में दलित जाति से आने वाली 19 साल की लड़की से हैवानियत और गैंगरेप मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। ’ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पीड़िता 14 सितंबर को लापता हो गई थी और 22 सितंबर को वह बुरी तरह से घायल अवस्था में मिली थी। उसका गैंगरेप हुआ था।

अधिकारियों ने कहा कि आयोग ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजे हैं। पता चला है कि 14 सितंबर को पीड़िता अपनी मां के साथ खेतों में गई थी और कुछ ही समय बाद लापता हो गई थी। बाद में जब वह मिली तो वह बुरी तरह घायल थी, उसे पीटा गया था, प्रताड़ित किया गया था, उसकी जीभ काट ली गई थी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उसका गला घोंटने का प्रयास किया। इसके बाद उसे जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था, बाद में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पाया कि अनुसूचित जाति समुदाय की युवती का यौन उत्पीड़न हुआ और उसके साथ बर्बरता की गई थी। आयोग ने कहा, ‘यह स्पष्ट है कि पुलिस पीड़िता को खोजने और बचाने के लिए समय पर कार्रवाई करने में सक्षम नहीं थी, जिसके कारण उसे गंभीर क्रूरता के शिकार होने से नहीं बचाया जा सका। ’

आयोग ने कहा कि जिस तरह से अपराधियों ने इस वीभत्स घटना को अंजाम दिया है, उससे पता चलता है कि उनके मन में कानून का कोई डर नहीं था। परिवार को एक अपूरणीय क्षति हुई है। यही नहीं, परिवार ने भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने जबरन पीड़िता के शव का दाह-संस्कार किया। हालांकि, पुलिस का तर्क है कि परिवार की मर्जी से ही कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए ऐसा हुआ। हाथरस गैंगरेप पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए देशभर में आवाज़ें उठ रही हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलने हेतु दिल्ली से हाथरस के लिए रवाना हुए। लेकिन दिल्ली से कुछ दूरी पर जब दोनों नेताओं का काफिला ग्रेटर नोएडा के करीब पहुंचा, तो पुलिस ने उन्हें रोक लिया, जिसके बाद राहुल और प्रियंका पैदल ही हजारों कार्यकर्ताओं के साथ हाथरस के लिए रवाना हो गए। प्रशासन ने हाथरस की सीमाओं को सील किया हुआ है और धारा 144 भी लगाई गई है। आजमगढ़, बागपत, बुलंदशहर में भी बच्चियों से दरिंदगी हुई है। आम आदमी पार्टी की ओर से मुंबई में भी प्रदर्शन किया गया और हाथरस की मनीषा के लिए इंसाफ की अपील की गई।

इस बीच प्रदेश सरकार ने जिस एस आई टी का गठन किया है, उसने अपनी जांच शुरू कर दी है। गृह सचिव भगवान स्वरूप की अगुवाई में एसआईटी की टीम ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की। जिसके बाद जानकारी दी गई है कि टीम की ओर से शुरुआती जांच शुरू कर दी गई है, सात दिन के अंदर हर पहलू पर मंथन किया जाएगा और रिपोर्ट दी जाएगी। आपराधिक आंकड़ो पर नज़र डालें तो सन 2018 के मुकाबले सन 2019 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सन 2018 में महिलाओं के खिलाफ हुए 3, 78, 236 अपराधों के मुकाबले सन 2019 में 4, 05, 861 अपराध दर्ज किए गए। इस तरह प्रति एक लाख महिलाओं पर अपराध की दर 62.14 प्रतिशत दर्ज की गई है। जबकि सन 2018 में यह दर 58.8 प्रतिशत थी। महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए है, इनकी संख्या 59, 853 रही। वही आसाम में प्रति एक लाख महिलाओं पर सबसे ज्यादा अपराध की दर 17.8 प्रतिशत दर्ज की गई।

राजस्थान में दलित महिलाओं के साथ 554 गंभीर अपराध के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। वहीं उत्तर प्रदेश में 537 और मध्य प्रदेश में 510 मामले दर्ज किए गए। प्रति एक लाख आबादी पर दलित महिलाओं के साथ गंभीर अपराध के मामलों की दर में 4.6 प्रतिशत के साथ केरल सबसे आगे है। उसके बाद 4.5 प्रतिशत के साथ मध्य प्रदेश और राजस्थान है।

सन 2019 में भारत में महिलाओं के साथ गंभीर अपराध के कुल 31, 755 मामले दर्ज किए गए, इस हिसाब से यदि रोजाना का औसत निकाला जाए तो प्रतिदिन 87 गंभीर मामले मामले सामने आए है। जिनमे सबसे ज्यादा राजस्थान में 5 हजार 997 मामले दर्ज किए गए है। वही उत्तर प्रदेश में 3, 065 मामले और मध्य प्रदेश में 2, 485 मामले दर्ज किए गए। हैरत की बात यह है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में 30.9 प्रतिशत मामलों के आरोपी पति या उसके रिश्तेदार जिम्मेदार पाए गए। कुल 21.8 प्रतिशत मामले महिला की मर्यादा को भंग करने के इरादे से किए गए हमले के तहत सामने आए है। जिनमे 17.9 प्रतिशत महिला अपहरण के और 7.9 प्रतिशत मामले महिलाओं की मर्यादा भंग करने के सामने आए है। सन 2019 में पूरे देश में महिलाओं पर 150 एसिड अटैक के मामले दर्ज किए, जिनमें से 42 उत्तर प्रदेश में और 36 पश्चिम बंगाल में है। जिससे स्पष्ट है कि महिलाएं सुरक्षित नही है और उनकी जान व आबरू दोनो पर संकट लगातार बढ़ रहा है। जो गम्भीर चिंता का विषय है। हालांकि उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजन राय व जसप्रीत सिंह ने हाथरस की इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार की सुरक्षा, समुचित सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही जिला जज हाथरस व दो अधिवक्ताओ को पीड़ित परिवार से मिलने, घटना की पूरी जानकारी लेने के आदेश दिए है। जिसमे उत्तर प्रदेश सरकार व पुलिस को नोटिस जारी कर मामले की सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर नियत की गई है।

  • श्रीगोपाल नारसन

 

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