गुलाम नबी आज़ाद का मोदी सरकार पर वार, कुछ नहीं कह पाए मोदी

राजयसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद ने मोदी सरकार को सवालों के ज़रिये घेर लिया, लेकिन वहां मौजूद होते हुए भी प्रधानमन्त्री खामोश रहे

किसान आंदोलन को लेकर राजयसभा में आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। 3 कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष ने अपनी आवाज़ बुलंद कर दी है। जहाँ कुछ समय पहले तक यह बयानी दौर आमने सामने जारी नहीं था वहीँ अब आमने सामने बयानी युद्ध का आगाज़ हो चुका है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने राजयसभा में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में केंद्र सरकार की तुलना अंग्रेज़ों के शासनकाल से कर दी । गुलाम नबी आज़ाद ने कहा “इस देश में किसान अंग्रेजों के शासनकाल से संघर्ष करते आ रहे हैं और हर बार किसानों की कोशिशों से शासन, झुकने पर मजबूर हुआ है।

आज़ाद यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे 1900 के दशक में पंजाब में हुए किसान आंदोलनों के दौरान लोकप्रिय गीत ‘‘पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल’’ की कुछ पंक्तियों का भी उल्लेख करते हुए मोदी सरकार पर अप्रत्यक्ष तौर पर शिकंजा कसा और कहा कि किसानों ने अंग्रेज सरकार को भी अपने कानून वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया था। गुलाम नबी आज़ाद ने राजधानी दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसक झड़प को निंदनीय बताया और कहा की इस हिंसा को भड़काने के पीछे जितने भी आरोपी हैं उन्हें सजा मिलनी चाहिए लेकिन उन दोषियों की आड़ में निर्दोष किसानों के साथ बदसलूकी न की जाए।

बता दें की बीते दिनों 26 जनवरी को हुए हिंसक झड़प के मामले में पुलिस ने शशि थरूर समेत कई नामचीन पत्रकारों पर देशद्रोह का मुकदमा दायर किया है। इस मुद्दे पर भी गुलाम नबी आज़ाद अपनी प्रतिक्रिया देते दिखाई दिए। आजाद ने कहा कि जो व्यक्ति देश का पूर्व विदेश राज्य मंत्री रह चुका हो और विश्व में देश का नेतृत्व कर चुका हो, जिसे लोगों ने लोकसभा के लिए चुना हो, वह व्यक्ति देशद्रोही कैसे हो सकता है?

सिर्फ किसान आंदोलन पर ही नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर भी गुलाम नबी आज़ाद ने सरकार से अपील की। आज़ाद ने कहा की जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिया जाना चाहिए। क्योंकि ऐसा करके ही वहां कानून और अन्य व्यवस्थाओं को कायम रखा जा सकता है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को उन्होंने जम्मू कश्मीर के पतन की वजह बताई। उन्होंने कहा की जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीन लिया गया है और इसी वजह से यहाँ पर्यटन, शिक्षा और रोज़गार सहित कई क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ा है। हालांकि जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सफलता पर आज़ाद ने मोदी सरकार की सराहना भी की है।

 

 

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