कोरोना काल में RBI एक बार फिर से देने वाला है Loan Restructuring

महामारी की दूसरी लहर में एक बार फिर व्यापार के आर्थिक घाटे को देखते हुए बैंकिंग सेक्टर में Bank Loan Restructuring और Loan Moratorium पर चर्चा शुरू हो गयी है, उम्मीद जताई जा रही है कि इनमें से कोई एक राहत जनता को जल्दी मिल पाएगी

कोरोना की दूसरी लहर की वजह से कई राज्यों में लॉकडाउन और दूसरे मनाहियों के चलते देश में कारोबारियों की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ने लगी हैं। कारोबार में काफी सुस्ती आ गयी है, जिसकी वजह से उनकी लोन चुकाने की कपैसिटी घटती जा रही है। इसलिए ऐसे समय में रिजर्व बैंक लोन रिस्ट्रक्चरिंग देने पर फिर से विचार कर रहा है।

आरबीआई की तरफ से पिछले साल जो लोन रिस्ट्रक्चरिंग की फैसिलिटी दी गयी थी उसकी आखिरी तारिख 31 दिसंबर तक ही थी। पर एक बार फिर कोरोना ने अपना कोहराम मचाना शुरू कर दिया है जिस वजह से लोन रीस्ट्रक्चरिंग की फिर एक बार जरूरत आन पड़ी है। खास तौर पर छोटे कर्जदारों को इसकी सबसे ज़रूरत है जिन्होंने नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों से लोन लिया है। खबर तो ये भी है की 500 करोड़ रुपये से कम वाली नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों को लोन रिस्ट्रक्चरिंग मौका दिया जा सकता है।

इस बारे में बैंकिंग सेक्टर से जुड़े ऑर्गनाइज़ेशन की ओर से रिजर्व बैंक को चिट्ठी भी लिखी गई है। जिसमें आरबीआई से मांग की गई है कि मौजूदा हालत में छोटे दुकानदार, टैम्पो और ट्रक वाले छोटे कारोबारियों का कारोबार कमजोर हुआ है। ऐसे में उन्हें इस नियम से राहत दी जाए।

रिजर्व बैंक से रिस्ट्रक्चरिंग की अपील की गई है। अगर आरबीआई इस मांग को मान लेता है तो न सिर्फ ये कर्ज एनपीए होने से बच जाएगा बल्कि कारोबारियों और नॉन बैंकिंग कंपनियों को भी उसे चुकाने के लिए और समय मिल जाएगा।

रिजर्व बैंक फिलहाल पिछले साल की तरह लोन पर राहत देने के मूड में नज़र नहीं आ रहा है। आरबीआई ने अप्रैल में हुई मॉनेटरी पालिसी की समीक्षा मीटिंग के बाद ये साफ कर दिया था कि इस बार मोरटोरियम से जुडी राहत पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि पिछले साल जब महामारी आई थी तब इसके लिए कोई तैयारी नहीं था और मोरटोरियम जैसे बेहद कारगर विकल्प के इस्तेमाल की जरूरत पड़ी थी। लेकिन उस समय से लेकर अब के समय में काफी बदलाव आ गया है। आरबीआई के पास इसके कई नए तरीके हैं।
आरबीआई गवर्नर ने ये भी कहा था कि जो भी कदम उठाया जाएगा पूरी तरह सोच समझ कर, सभी पहलुओं को देखते हुए और लंबे समय के फायदे के नजरिए से उठाया जाएगा, जल्दबाजी में कोई भी ऐसा फैसला नहीं होगा जनता या फिर बैंकिंग प्रणाली को नुक्सान हो।

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