Diriliş Ertugrul, Tayyip Erdogan और कट्टरता की राजनीति

तुर्की की मशहूर टीवी सीरीज़ ‘इरतरुल गाज़ी’ के पिछले साल उर्दू/हिंदी में डब होते ही हिंदुस्तान, पाकिस्तान, मिडिल ईस्ट, योरोप और अमेरिका में रहने वाले सब कॉन्टिनेंट के मुस्लिम्स में जबरदस्त हिट हुई थी। पिछले दिनों इसी सीरीज़ का नया सीज़न कुरलुस ओसमान-2 शुरू हुआ है। इस सीरीज की मकबूलियत का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि तुर्की से पुरानी दुश्मनी के चलते अरब मुल्कों ने इसपर बैन लगा दिया गया, यहाँ तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप तक ने इसकी आलोचना कर डाली।

इस सीरीज़ की मकबूलियत की एक वजह यह भी है कि इसकी शुरुआत ओसमानिया सलतनत की नीव रखने वाले ओसमान गाज़ी के पिता इरतुरुल गाज़ी से की गई है, जो कि दुश्मनों के विरुद्ध बेहद जाबांजी से लड़ता था और निजी ज़िन्दगी में बहुत ज़्यादा इन्साफ पसंद था। यह छवि पश्चिमी मीडिया के द्वारा मुसलमानों के विरुद्ध बनाई जा रही छवि के बिलकुल उलट है। हालांकि ‘इरतरुल गाज़ी’ में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान का किरदार नहीं है, पर सीरीज़ के बाद से इस्लामिक वर्ड में उन्हें मज़बूती के साथ लीडर माना जाने लगा है। उनको वैश्विक मंच पर मुस्लिम समुदाय का पक्ष मज़बूती के साथ रखने वाला माना जा रहा है। आपसी बातचीत के रुझान के साथ-साथ यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर अर्दोगान से रिलेटेड वीडियोज़ के व्यूज़ में बड़ी तेजी से उछाल आया है।

हालाँकि तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोगान की छवि तरक्की पसंद और जनता के काम करने वाले हीरो की रही है, जो अपनी नीतियों से तुर्की को तेज़ी के साथ तरक्की की राह पर लेकर गया था। 2011 में तुर्की की जीडीपी ग्रोथ 11.1% तक पहुंच गई थी। पर 2016 के बाद ग्रोथ कम होने लगी, यहां तक कि 2019 में 0.9% तक पहुंच गई है। तुर्की में बेरोज़गारी चरम पर है, सरकार के खिलाफ बोलने वाले पत्रकारों और आम लोगों को जेल में डालने में तुर्की दुनिया में सबसे अव्वल नंबर पर पहुंच चुका है, मतलब चाइना से भी आगे।

हाल के दिनों में ऐसा महसूस हुआ है कि उनके इकोनॉमिक्स फेलियर के कारण शायद उनका झुकाव एक धार्मिक पर्सनेलिटी से हटकर कट्टरपंथ की तरफ हुआ है, जिसकी झलक आया सोफिया म्यूज़ियम को वापिस मस्जिद बनाने से दिखाई दे रही है। यह अंदेशा अगर सच निकलता है तो चिंता का विषय रहने वाला है।

अभी तक के इतिहास से जो सीखने को मिलता है उसके हिसाब से जब शासक जनता की तरक्की के काम करने की जगह राष्ट्र, धर्म, जाति, समूह इत्यादि की आड़ में इमोशनल मुद्दे उठाने लगता है तो इसका मतलब लोगों का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाना होता है, जिसके कि जनता उसी में फंसी रहे। पर यह इमोशनल राजनीति दलदल की तरह होती है। जो एक बार इसमें फंसा, वो फंसता चला जाता है, यहाँ तक कि जनता के हित कहीं पीछे छूट जाते हैं।

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As Ertugrul Ghazi’ was dubbed in Urdu / Hindi last year, there was a tremendous hit among Muslims of all continents living in India, Pakistan, Middle East, Europe and America. From today its sixth season Kuralus Osman 2 is going to start. It was banned by the Arab countries due to the old rivalry with Turkey. Although Turkish President Rajab Tayyib Ardogan does not have the character in Dirilis Ertugrul, but he has been firmly regarded as a good leader in the Islamic Word because of the popularity of the series. Along with the mutual interaction trend, views of videos related to Ardogan have grown rapidly on the social media platforms such as YouTube.

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Shahnawz 'Sahil'

पत्रकारिता से करियर शुरुआत की, विज्ञापन एवं डिज़ाइन के क्षेत्र में कार्यरत तथा ग़ालिब के शहर दिल्ली में रहता हूँ...

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