स्त्री सरोकार

पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली रूढ़िगत व्यवस्थाओं ने समाज में स्त्री को सदैव दोयम दर्जे का नागरिक बनाये रखा। अपनी पारम्परिक भूमिकाओं से बाहर निकल आज चेतनसम्पन्न स्त्री अपने अधिकारों के प्रति न केवल सचेत और जागरूक हुई है बल्कि आदर्शों की जकड़न से बाहर निकल अपनी एक नई तस्वीर प्रस्तुत कर रही है। धर्म,आस्था,परम्परा,मूल्यों,दोहरे मापदन्डों के सत्य को समझने वाली आज की स्त्री के समक्ष बहुत सवाल उठ रहे हैं और बहुत सारी चुनौतियाँ का सामना कर रही है। आज भी बहुतायत स्त्रियाँ अपने अधिकारों और सरोकारों के प्रति सचेत नहीं हैं और लगातार शोषण का शिकार हो रही हैं। “स्त्री सरोकार” कॉलम में ऐसी ही स्त्रियों से जुड़े तमाम मुद्दों और सरोकारों को शामिल करना हमारा प्रयास रहेगा,जिससे हर वर्ग और समुदाय की स्त्री को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

डॉ. आशा रानी
संपादक

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