गिरफ्तार पत्रकार मनदीप पुनिया को मिली बेल, जेल में अपने पैर पर लिखते थे रिपोर्ट

पुलिस ने पत्रकार मनदीप पुनिया को पुलिस ने दुर्व्यवहार करने के आरोप में सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। मनदीप किसान आंदोलन में रिपोर्टिंग कर रहे थे और वे 1 फ्रीलांसर पत्रकार है। हालाँकि अदालत ने मनीष को 25 हज़ार रुपए में रिहा कर दिया था। और कहा था की पुनिया 1 फ्रीलांसर पत्रकार है है वे जांच को प्रभावित नहीं करेगा और उसे हिरासत में रखे जाने से किसी भी उद्देश्ये की पूर्ति नहीं होगी।

अब जेल से बाहर आने के बाद मनदीप में अपनी आप बीती सुनाई उन्होंने कहा की जेल में उन्होंने अपने पैर पर ही नोट्स लिख लिए थे जिससे की बहार आके वो बता सके।  उन्होंने बताया की जेल में उन्होंने किसानो से बात की और उनसे पूछा की उन्हें जेल में क्यों बंद किया गया है। और उनसे बात करने के बाद मनदीप ने उनकी बाते अपने पेरो पर ही लिखली ताकि वो बहार आके रिपोर्ट्स बना सके।

मनदीप को रविवार को तिहार जेल में मेट्रोपोलिटन मेजिस्ट्रेट के साने पेश किया गया था और उनके वकील ने कहा की बचाव पक्ष का वकील पेश नहीं हुआ है इसके बाद मनीष को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उस दिन सिंघु बॉर्डर पर 2 पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया था जिसमे से 1 को उसी वक़्त रिहा कर दिया गया और मनीष को जेल में दाल दिया गया। हिरासत में लिए जाने से कुछ घंटे पहले पुनिया ने सिंघु बॉर्डर पर हुई हिंसा के संबंध में फेसबुक पर एक लाइव वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्‍होंने कहा था कैसे खुद को स्‍थानीय होने का दावा करने वाली भीड़ ने आंदोलनस्‍थल पर पुलिस की मौजूदगी में पथराव किया था।

बता दे की मनदीप पुनिया पर धारा IPC की 186 (सरकारी काम में बधा पहुंचना), 332 (लोकसेवक को चोट पहुँचाना) और 353 (सरकारी अधिकारी पर हमला करना) लगाई गयी थी। जिसके बाद काफी पत्रकारों ने इसके खिलाफ विरोध किया और कई पत्रकारों ने मनदीप की तुरंत रिहाई की मांग की थी। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने भी पुलिस को गलत बताय था और कहा था की मनदीप को गिरफ्तार करना गलत है।लेकिन किसी पुलिस कर्मी ने 1 न सुनी और मनडीप को जेल में दाल दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री वे अकाली दाल की नेता ने भी ट्वीट करते हुए लिखा था की पहले सरकार ने किसानो को बदनाम किया और अब पत्रकारों को बदनाम कर रही है

हालाँकि अब मेट्रोपोलिटन मेजिस्ट्रेट सतबीर सिंह लम्बा ने उन्हें रिहा करते हुए कहा है की शिकायत करता, गवाह और पीड़ित सिर्फ पुलिस कर्मी ही है इसलिए इस बात की कोई संभावना नहीं है कि वे किसी भी पुलिस अधिकारी को प्रभावित कर सकता है।

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