शबनम मामले में माफ़ी मांगने की एक और कोशिश, राज्यपाल को दी याचिका

अपने परिवार के 7 लोगों को प्रेमी के साथ बेहरहमी से मार देने वाली शबनम ने अब उपराजयपाल आनंदीबेन पटेल से माफ़ी की गुज़ारिश की है

14/15 अप्रैल 2008 को अपने प्रेमी सलीम के साथ अपने ही परिवार के 7 लोगों की हत्या करने वाली शबनम को किसी भी वक़्त फांसी हो सकती है। लेकिन बार बार फांसी की प्रक्रिया में कोई न कोई रुकावट आ रही है। फिलहाल ये रुकावट शबनम की माफ़ी भरी याचिका से आ गयी है। बता दें की शबनम ने उपराजयपाल आनंदीबेन पटेल को एक याचिका लिखी है जिसमें उनकी फांसी माफ़ करने को कहा गया है। गौरतलब है की इस से पहले शबनम के वकीलों ने राष्ट्रपति को भी ऐसी ही माफ़ी भरी याचिका भेजी थी और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया जा चुका है। लेकिन वहां भी शबनम की याचिका खारिज हो गयी थी।

गौरतलब है की इस से पहले इस केस में अमरोहा की जिला अदालत ने 2010 में दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा दी थी। 2015 में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां भी लोअर कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया। राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से भी 11 अगस्‍त 2016 को शबनम की दया याचिका को ठुकरा दिया गया था। 2019 में शबनम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार भी किया गया था। लेकिन वहां भी शबनम को कोई राहत नहीं मिली थी।

जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद कोई भी शख्स या विदेशी नागरिक अपराधी के लिए राष्ट्रपति के दफ्तर या गृह मंत्रालय को दया याचिका भेज सकता है। इसके अलावा संबंधित राज्य के राज्यपाल को भी दया याचिका भेजी जा सकती है। राज्यपाल अपने पास आने वाली दया याचिकाओं को गृह मंत्रालय को भेज देते हैं। इसलिए जब शबनम के हथकंडे कहीं काम नहीं आये तो अब हार धारकर उन्होंने राजयपाल को याचिका भेजी है। राजयपाल इस याचिका को राष्ट्रपति के पास भेजेंगी लेकिन अगर रिव्यु पिटीशन के बाद भी राष्ट्रपति का फैसला बरकरार रहा तो शबनम स्वतंत्र भारत की पहली ऐसी महिला होंगी जिनको फांसी की सजा दे दी जाएगी।

इस खबर से शबनम भी अवगत हैं की उनके पास ज़्यादा दिन नहीं रह गए हैं इसलिए अब वो काफी चुप चुप सी रहने लगी हैं। इस से पहले वो जेल में खामोश नहीं रहती थी। बता दें की अमरोहा के जिला जज से डेथ वारंट माँगा गया है जैसे ही डेथ वारंट आ जाएगा वैसे ही शबनम को मथुरा जेल भेज दिया जाएगा। प्रदेश का एकमात्र फाँसीघर मथुरा में ही है जहां वहां के जेलर के मुताबिक़ अभी तक एक भी महिला को फांसी नहीं लगाई गयी है। इस फाँसीघर की मरम्मत भी ठीक से नहीं हुई ह, जो अभीतक ठीक ढंग से बना भी नहीं हुआ। इस वजह से शबनम की फांसी को टाला भी जा सकता है।

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